paise kaise bachaye | आर्थिक तंगी के कारण | faltu kharche kaise hote hai

is post main maine bataya hai ki paise kaise bachaye | आर्थिक तंगी के कारण  | faltu kharche kaise hote hai, aaj ke time main 80000 kamane wala bhi paise ki tangi se jhoojh rha hai.

paise kaise bachaye | आर्थिक तंगी के कारण

ऐसे बहुत से लोग होते हैं, जो अच्छी खासी मेहनत भी करते हैं और अच्छा पैसा भी कमा लेते हैं ,लेकिन वह फिर भी आर्थिक तंगी से जूझते रहते हैं | उनके पास में खर्चे ही खर्चे रहते हैं| 

Paise nahi bachne ke karan:-

इसके बहुत सारे कारण है जो इस प्रकार है

सबसे पहला कारण तो यह है कि वह (hum) अपने खर्चे को अपनी जरूरत के हिसाब से use नहीं करते हैं और दिखाने के लिए ज्यादा खर्चा कर देते हैं| जैसा कि यदि आपके पास में 10000 का मोबाइल है वह अच्छा खासा मोबाइल है, फिर भी आप अपने पड़ोसी को देखकर उसने यदि साडे 70 hajar ka  मोबाइल खरीदा है,

 तो आप भी उसकी बराबरी करने के लिए उससे महंगा मोबाइल खरीदते हैं यह भी एक कारण है | paise kaise bachaye

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Mismanagement

गलत मैनेजमेंट भी आर्थिक तंगी का सबसे ज्यादा कारण है यदि आप सोच समझकर पैसों को इन्वेस्ट नहीं करते हैं तो आप आर्थिक तंगी में रहते हैं। पास की दूरी पर मोटरसाइकिल की वजह कार ले जाना।

 बहुत से लोग ऐसे होते हैं ,जिनको 1 या 2 किलोमीटर के दायरे में जाना होता है। वह apani  शानो शौकत दिखाने के लिए एक मोटरसाइकिल के स्थान पर 2 कार ले जाते हैं। paise kaise bachaye.

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गलत आदतों को अपनाना

बहुत से व्यक्ति ऐसे होते हैं ,जो मेहनत भी करते हैं , अच्छा पैसा भी कमाते हैं , लेकिन वह अपने दोस्तों के साथ में रहकर गलत आदतों को अपना लेते हैं |  जिस कारण उनके खर्चे अधिक होने लग जाते हैं |  मुझे लगता है कि यह कुछ jankari  आपको मदद करेंगे इस jankari  को आप अन्य लोगों को भी शेयर कर दीजिएगा | paise kaise bachaye

8 reasons for waste of money in feature in hindi

आगामी 10 वर्षों में अधिकतम घरों की अर्थिक स्थिति बिगड़ने के प्रमुख कारण..ये हाेगें

  • घर मे प्रत्येक सदस्य के पास स्मार्ट फोन, एवं प्रति वर्ष नया लेना।
  • जन्म दिन, मैरिज एनीवर्सरी में दिखावटी खर्चे।
  • जीवन शैली में बदलाव के कारण खर्चों का बेतहाशा बढ़ना।बच्चों के स्कूल, ट्यूशन आदि शिक्षण खर्चों में वृद्धि।
  • धार्मिक संस्कार में कमी ! घर का बना हुआ कम खाना बाहर का ज्यादा खाना।
  • व्यक्तिगत खर्चे, ब्यूटी पार्लर, सेलून, ब्रांडेड कपड़ा, पार्टी, गेट टूगेदर आदि।
  • सगाई, शादी आदि में प्रतिष्ठा की भूख के कारण होने वाले खर्चे।
  • लोन पर दिया जाने वाला ब्याज।
  • मेडिकल खर्चों में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी। कारण गलत खान पान।

इस तरह के बिना जरूरत के खर्चो के अनुरूप कमाई बढ़ नहीं रही है। परिणाम, तनाव तनाव तनाव। इसलिए बिना जरूरत के खर्चे कम करे। जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान की थी, है, और रहेंगी। इच्छाएं अनन्त है l इन का कोई अन्त नहीं |

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Amit Ji ki story on money

अमित 24 वर्ष का एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। वो महीने का 25,000 रुपए कमाता है। वो हर महीने अपने मासिक वेतन से 10,000 रुपए तक बचा लेता है।

लगभग 4 साल बाद..

अमित अब 28 वर्ष का है और उसका वेतन बढ़ क़र 70,000 प्रति माह हों चुका है। उसने अब तक कुछ 8 लाख रुपए बचा लिए है पिछले चार सालो मे बाकि पैसा लम्बे निवेश के तौर पर लगा हुआ है।

अब आती है अमित की शादी की बात। उसकी शादी नेहा से तय होती है जो महीने का 35,000 रुपए कमाती है। शादी के दौरान गहने, कपड़ो, उपहारों और हनीमून के लिए जाने, सब क़ो गिन क़र अमित की पूरी बचत चली जाती है।
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इसका मतलब जहाँ अमित ने पिछले 4 सालो मे लगभग 8 लाख जोड़े थे वो ख़तम हों चुके है और अब शादी के बाद वो फिर से शून्य से शुरुआत करेगा। शादी के तुरंत बाद अमित क़ो लगता है की क्यों ना वो खुद का घर खरीद ले क्योंकि अब वो और नेहा मिल क़र महीने का 1 लाख 5 हज़ार रुपए कमाते है और उससे उसे क़र (टैक्स) मे भी लाभ होगा।

वो घर से कुछ पैसे ले क़र और नेहा की बचत से डाउन पेमेंट दे क़र एक 2 BHK फ्लैट खरीद लेता है जिसके लिए वो बैंक से 20 साल के लिए 40 लाख रुपए का लोन ले लेता है जिसके लिए हर महीने उसको लगभग 36,000 रुपए बैंक क़ो देने है।

उन्हें लगता है हम 15 हज़ार महीने का किराया वैसे भी दे रहे थे उससे अच्छा है अपना खुद का घर होना। एक साल बाद अमित ने सोचा क्यों ना गाड़ी खरीद लू क्योंकि उसकी उम्र के सभी लोगो के पास अब गाड़ी है और वैसे भी अब वो परिवार वाला आदमी हों चुका है। वो 5 लाख का ऋण लेता है अगले तीन सालो के लिए जिसके लिए उसको बैंक क़ो हर महीने लगभग 16,000 रुपए देने होंगे।

फिर कुछ महीनों मे नेहा गर्भवती हों जाती है और वो नौकरी छोड़ती है ताकी बच्चे का ध्यान अच्छे से रख सके।

इस दौरान अमित का वेतन बढ़ क़र 80,000 हों जाता है पर जो नेहा 35,000 रुपए कमा रही थी वो अब नहीं है। यानी उनके मासिक खर्चे कुछ इस प्रकार है —

  1. घर की emi – 36,000
  2. गाड़ी की emi – 16,000
  3. घर का खर्च (बाईं, फल-सब्जी, गैस इत्यादि) – 15,000
  4. बिजली पानी का बिल – 3,000
  5. इंटरनेट और फ़ोन रिचार्ज – 2000
  6. बच्चे का खर्च (जो अभी स्कूल नहीं जाता) – 2000
  7. यानि कुल मिला क़र महीने का खर्च है लगभग 75,000 रुपए महीना।

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अब अगर आप देखे तो आज से 6 साल पहले ज़ब अमित 25,000 रुपए कमाता था तब वो उसमे भी 10,000 तक की बचत क़र लेता था पर अब 80,000 रुपए कमाने पर भी वो सिर्फ 5,000 रुपए महीना बचा पाता है।

निष्कर्ष:-

friends ye khuch information thi wo faltu kharche Kaise hote hai use show karti hai. ummid hai aapko ye post pasand aayegi. paise Kaise bachaye | आर्थिक तंगी के कारण  | faltu kharche Kaise hote hai.

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